बुधवार, 29 मई 2013
शनिवार, 18 मई 2013
शनिवार, 4 मई 2013
शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013
Pyar Ke Do Naam- Ek Raadha Ek Shyaam_ Thandi Thandi Chali Purwayi
Bahot khoob hoti hai mohabbat mein judai,
Saath deti hai har waqt tanhai,
Nigahon mein aakar theher jate hain aansu,
Puchti hain zindagi ab tak maut kyun nahi ayi!
Saath deti hai har waqt tanhai,
Nigahon mein aakar theher jate hain aansu,
Puchti hain zindagi ab tak maut kyun nahi ayi!
मंगलवार, 9 अप्रैल 2013
रही तुम बेखबर !!!
नाराज़ आँखे बोलती रही रातभर
पर आंच न आया तुम पर -
रही तुम बेखबर !
सूखे पत्ते सा फडफडाता रहा यूं ही
और गीली आँखों ने चाँद -
सुखाया रातभर !
बुझी हुई आँखों से ज़िन्दगी को देखा इस कदर
चलती हुई ज़िन्दगी को -
पकड़ता रहा बस रातभर !
काँटों से ख़्वाबों ने आँखों को खूब चुभोया है
आंसुओं ने सहलाया है पर -
उनींदे आँखों को रातभर !
शायद ज़िन्दगी की यही चाल है ---पता नहीं
आंसूं और ख्वाब ने हंगामा -
मचाया है रातभर !
सोमवार, 1 अप्रैल 2013
रविवार, 31 मार्च 2013
सोमवार, 25 मार्च 2013
सोमवार, 4 मार्च 2013
यूँ बरसों पहले मिल जाते
कितना अच्छा होता !जो तुम
यूँ बरसों पहले मिल जाते
सच मानो इस मन के पतझर-
में फूल हज़ारों खिल जाते
खुशबू से भर जाता आँगन ।
कुछ अपना दुख हम कह लेते
कुछ ताप तुम्हारे सह लेते
कुछ तो आँसू पी लेते हम
कुछ में हम दो पल बह लेते
हल्का हो जाता अपना मन ।
तुमने चीन्हें मन के आखर
तुमने समझे पीड़ा के स्वर
तुम हो मन के मीत हमारे
रिश्तों के धागों से ऊपर
तुम हो गंगा -जैसी पावन ।
सोमवार, 11 फ़रवरी 2013
दिल के कागज़ पर लिखा है,नाम केवल आपका
दिल के
कागज़ पर लिखा है,नाम केवल आपका
ध्यान मन में लगा रहता है हरेक पल आपका
क्या गजब का हुस्न है और क्या अदाएं आपकी,
घूमता आँखों में रहता, चेहरा चंचल आपका
हम को दीवाना दिया है कर
तुम्हारी चाह ने ,
सोने के साँचें से आया , ये बदन ढल आपका
बन संवर के ,निकलती हो ,जब ठुमकती चाल से,
दिल करे दीदार करता रहूँ दिन
भर आपका
श्वेत केशों पर न जाओ,उम्र में क्या रखा,
प्यार देखो,दिल जवां है,और पागल आपका
बात सुन वो हँसे,बोले आप है सठिया गये,
जंच रहा है ,नहीं हमको ,ये प्रपोजल आपका
फिर भी ये तारीफ़ सुन कर,हमको है अच्छा लगा,
तहे दिल से शुक्रिया है,डियर ‘सोहन’ आपका
सोमवार, 4 फ़रवरी 2013
कहाँ से लाऊं ओ पल
रात तुम्हारी बाँहों में कटे ,सुबह हलकी हलकी लगे |
दिन तुम्हारे ख्यालों में गुजरे तो रात हलकी हलकी लगे ||
जो तुम्हे देखा तो सांसे गई थम ,सारी सारी रात सोये ना हम |
तुम साथ होकर भी साथ नहीं होती ,अब तो रात होकर भी रात नहीं होती ||
दिन गुजरा तन्हाई में ,रात गुजरी रुशवाही में |
कहाँ से लाऊं ओ पल ओ सुकून,जो कभी तुमने मुझे दिए ||
पर सोचा जो दिया ओ उधार समझूँ ,आएगा एक दिन जब सूत समेत वापस करूँ ||
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